Madhyamik Parsad Test Paper 2026 History Page 182 (Hindi) Solution | Madhyamik 2026 History Suggestion & Test Paper Solve
byMadhyamik Guide Official-
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Web Teacher - History Suggestion 2026
মাধ্যমিক ২০২৬ পরীক্ষার সময়সীমা
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SHEAKHALA BENIMADHAB GIRLS' HIGH SCHOOL (H.S.) - HISTORY
এই পেজে আমরা মাধ্যমিক টেস্ট পেপার ২০২৫-২৬ এর অন্তর্গত 'শেয়াখালা বেণীমাধব গার্লস হাই স্কুল (H.S.)'-এর ইতিহাসের প্রশ্নপত্রের (পৃষ্ঠা ১২৪) সম্পূর্ণ সমাধান নিয়ে আলোচনা করেছি। এখানে বিভাগ 'ক' (MCQ), বিভাগ 'খ' (SAQ, সত্য/মিথ্যা, স্তম্ভ মেলানো, বিবৃতি) এবং বিভাগ 'গ' (২ নম্বরের প্রশ্ন)-এর প্রতিটি প্রশ্নের সঠিক ও নির্ভুল উত্তর দেওয়া হয়েছে। ২০২৬ সালের মাধ্যমিক পরীক্ষার্থীদের জন্য এই সেটটি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ। প্রতিটি উত্তর টেস্ট পেপারের উত্তরমালা এবং পাঠ্যবই যাচাই করে তৈরি করা হয়েছে যাতে তোমাদের প্রস্তুতিতে কোনো খামতি না থাকে।
Overview & Solution Guide
This page provides a comprehensive solution for the History Test Paper (Page 124) of 'Sheakhala Benimadhab Girls' High School (H.S.)' for the Madhyamik 2026 examination. We have covered all sections including MCQ (Group A), SAQ, True/False, Match the Columns, Statements (Group B), and 2-mark questions (Group C). Each answer has been meticulously verified with the official key and standard textbooks to ensure accuracy. Practicing this set will significantly boost your confidence and help you score better in the upcoming board exams.
उत्तर: पर्यावरण का इतिहास मानव और प्रकृति के बीच के संबंधों को समझने में मदद करता है। यह हमें बताता है कि पर्यावरण कैसे बदलता है और मानव सभ्यता ने उस पर क्या प्रभाव डाला है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
उत्तर: सामाजिक इतिहास राजाओं और महान हस्तियों के बजाय आम लोगों के जीवन, संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचनाओं का अध्ययन है। यह समाज के निचले तबके और हाशिए पर रहने वाले लोगों के अनुभवों को सामने लाता है।
उत्तर: मधुसूदन गुप्त कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के छात्र और बाद में शिक्षक थे। 1836 में मानव शव का विच्छेदन (dissection) करने वाले वे पहले भारतीय थे, जिसने चिकित्सा विज्ञान में सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ा।
3.4 कम्पनी का शिक्षा नीति क्षेत्र में अद्योमुखी निस्पन्दन सिद्वांत (Downward Filtration Theory) कहने का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: मैकाले द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत के अनुसार, शिक्षा केवल उच्च और मध्यम वर्ग को दी जानी चाहिए। यह माना जाता था कि शिक्षा ऊपर से छनकर धीरे-धीरे आम जनता तक पहुंचेगी, जैसे पानी ऊपर से नीचे की ओर रिसता है।
3.5 दक्षिण-पश्चिम सीमान्त एजेन्सी क्यों गठित हुई थी ?
उत्तर: कोल विद्रोह (1831-32) के बाद, आदिवासियों के असंतोष को कम करने और छोटानागपुर क्षेत्र में उनके लिए एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने के उद्देश्य से 1833 में दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी का गठन किया गया था।
3.6 नील विद्रोह में ईसाई मिशनरियों की क्या भूमिका थी ?
उत्तर: ईसाई मिशनरियों ने नील किसानों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। रेवरेंड जेम्स लॉन्ग ने 'नील दर्पण' नाटक का अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित किया, जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने किसानों के पक्ष में जनमत तैयार किया।
3.7 'आनन्दमठ' उपन्यास ने किस प्रकार राष्ट्रीयता की भावना का संचार किया ?
उत्तर: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास 'आनन्दमठ' में 'वन्दे मातरम्' गीत और 'संतान दल' के माध्यम से देशभक्ति और आत्मबलिदान का आदर्श प्रस्तुत किया गया। इसने भारतीयों को मातृभूमि की मुक्ति के लिए प्रेरित किया।
उत्तर: 1) भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक समान राजनीतिक मंच पर लाना और उनमें एकता स्थापित करना। 2) हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच सद्भाव बढ़ाकर एक शक्तिशाली जनमत तैयार करना।
3.9 विद्यासागर फ्रांट (मुद्रालिपि) से क्या समझते हैं ?
उत्तर: ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने बंगाली छपाई को सरल और सुंदर बनाने के लिए बंगाली वर्णमाला में सुधार किया और नए प्रकार के टाइप (font) तैयार किए, जिसे 'विद्यासागर फॉन्ट' कहा जाता है। इससे बंगाली मुद्रण में क्रांति आ गई।
3.10 राष्ट्रीय शिक्षा परिषद् की स्थापना क्यों हुई ?
उत्तर: 1906 में बंग-भंग विरोधी आंदोलन के दौरान औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली के विकल्प के रूप में, राष्ट्रीय आदर्शों पर आधारित साहित्य, विज्ञान और तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना की गई थी।
उत्तर: अल्लूरी सीताराम राजू आंध्र प्रदेश के रम्पा विद्रोह (1922-24) के प्रमुख नेता थे। उन्होंने आदिवासियों को संगठित कर ब्रिटिश शासन के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया।
3.12 कांग्रेस समाजवादी दल की स्थापना के क्या उदेश्य थे ?
उत्तर: 1934 में स्थापित कांग्रेस समाजवादी दल का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस के भीतर वामपंथी और समाजवादी विचारों को बढ़ावा देना तथा किसानों और मजदूरों के हितों को राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बनाना था।
उत्तर: 1923 में लीला नाग द्वारा स्थापित दीपाली संघ का उद्देश्य महिलाओं में शिक्षा का प्रसार करना, उन्हें शारीरिक रूप से सशक्त बनाना (लाठी-खेल आदि द्वारा) और उनमें क्रांतिकारी भावना जगाना था।
उत्तर: मातंगिनी हाजरा एक गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी थीं। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में, 73 वर्ष की आयु में, उन्होंने तामलुक में एक जुलूस का नेतृत्व किया और पुलिस की गोलियों से शहीद हो गईं।
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग की जांच करने के लिए 1948 में एस.के. डार की अध्यक्षता में भाषाई प्रांत आयोग या डार कमीशन का गठन किया गया था।
3.16 सरदार वल्लभ भाई पटेल को "भारत का लौह पुरुष" क्यों कहा जाता है ?
उत्तर: सरदार वल्लभभाई पटेल ने 565 देशी रियासतों को भारतीय संघ में एकीकृत करने में अत्यंत दृढ़ता और कुशलता दिखाई, जिससे भारत की एकता और अखंडता सुनिश्चित हुई। उनके इस कठोर नेतृत्व के कारण उन्हें 'लौह पुरुष' कहा जाता है।
विभाग - 'घ' : सात या आठ वाक्यों में किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दीजिए
4.1 नारी इतिहास के ऊपर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर: पारंपरिक इतिहास लेखन में महिलाओं की भूमिका को अक्सर नजरअंदाज किया गया है। लेकिन 1970 के दशक से 'नए सामाजिक इतिहास' के तहत महिलाओं का इतिहास एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। इसमें समाज, राजनीति, परिवार और अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान का अध्ययन किया जाता है। पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं का संघर्ष, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी (जैसे प्रीतिलता वादेदार, मातंगिनी हाजरा), और सामाजिक सुधारों में उनकी भूमिका को अब इतिहास का अभिन्न अंग माना जाता है। यह इतिहास लैंगिक असमानता को दूर करने और महिलाओं को उनका उचित सम्मान दिलाने में मदद करता है।
4.2 श्री रामकृष्ण के 'सर्व धर्म समन्वय' के आदर्श की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर: 19वीं सदी के धर्म सुधार आंदोलन में श्री रामकृष्ण परमहंस का 'सर्व धर्म समन्वय' का आदर्श अत्यंत महत्वपूर्ण था। उनका मुख्य संदेश था 'यतो मत ततो पथ', अर्थात् जितने मत उतने पथ। उन्होंने हिन्दू, इस्लाम, और ईसाई धर्म की साधना करके यह अनुभव किया कि सभी धर्मों का अंतिम लक्ष्य एक ही ईश्वर की प्राप्ति है। उन्होंने बाहरी कर्मकांडों के बजाय भक्ति और पवित्रता पर जोर दिया। उनका कहना था 'जीव सेवा ही शिव सेवा है', अर्थात् मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है। उनके इस सरल और उदार संदेश ने सांप्रदायिक भेदभाव को कम करने और हिन्दू धर्म की कट्टरता को दूर करने में मदद की।
4.3 बारासात आन्दोलन की प्रकृति का विश्लेषण कीजिए या बारासात विद्रोह का महत्व का वर्णन कीजिए ।
उत्तर: तितुमीर के नेतृत्व में 1831 का बारासात विद्रोह बंगाल के वहाबी आंदोलन का एक प्रमुख अध्याय था। प्रकृति से यह एक किसान विद्रोह था, जहाँ गरीब मुस्लिम किसानों ने जमींदारों और नीलहे साहबों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। लेकिन इसका एक धार्मिक पहलू भी था क्योंकि तितुमीर इस्लाम का शुद्धिकरण चाहते थे। उन्होंने नारकेलबरिया में 'बांस का किला' बनाकर खुद को स्वतंत्र बादशाह घोषित किया और ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने का प्रयास किया। इसलिए कई इतिहासकार इसे ब्रिटिश विरोधी स्वतंत्रता संग्राम या राजनीतिक आंदोलन भी मानते हैं। कुल मिलाकर, यह शोषित किसानों का एक उग्र जन-आंदोलन था।
4.4 'गोरा' उपन्यास में रवीन्द्रनाथ की जिस राष्ट्रवादी भावना का परिचय मिलता है उसका विश्लेषण कीजिए ।
उत्तर: रवीन्द्रनाथ टैगोर का उपन्यास 'गोरा' भारतीय राष्ट्रवाद के विकास का एक उत्कृष्ट दस्तावेज है। उपन्यास का नायक गोरा शुरू में एक कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी था, जो जाति-पांति और रीति-रिवाजों का सख्ती से पालन करता था। लेकिन बाद में उसे पता चलता है कि वह जन्म से एक आयरिश (म्लेच्छ) है। यह आत्म-पहचान का संकट उसे एक बड़े सत्य का एहसास कराता है। वह समझता है कि सच्चा भारत किसी विशेष धर्म या जाति तक सीमित नहीं है। टैगोर ने दिखाया है कि संकीर्णता और सांप्रदायिकता से ऊपर उठकर मानव एकता ही सच्ची देशभक्ति है। गोरा अंततः एक सार्वभौमिक मानवतावाद को अपनाता है, जहाँ वह खुद को केवल 'भारतवर्षीय' मानता है।
4.5 बंगाल में छापाखाना के विकास में उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए ।
उत्तर: उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी बंगाल मुद्रण उद्योग के एक अग्रणी व्यक्तित्व थे। उन्होंने 1895 में 'यू. रे एंड संस' की स्थापना की। उन्होंने आधुनिक फोटोग्राफी और मुद्रण तकनीक का संयोजन करके 'हाफ़टोन ब्लॉक' प्रिंटिंग पद्धति की शुरुआत की, जिससे बंगाली पुस्तकों के चित्रण और छपाई की गुणवत्ता में सुधार हुआ। वे रंगीन मुद्रण में भी कुशल थे। उनके प्रयासों से बाल साहित्य विशेष रूप से आकर्षक बन गया। उनके प्रेस से 'संदेश' पत्रिका और 'टुनटुनिर बोई', 'गुपी गाइन बाघा बाइन' जैसी पुस्तकें प्रकाशित हुईं, जिन्होंने बंगाल के प्रकाशन जगत में एक नए युग की शुरुआत की। वे मुद्रण तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले गए।
4.6 एका आंदोलन के बारे में समालोचनात्मक विवरण दें।
उत्तर: 1921-22 में संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) के हरदोई, बहराइच, सीतापुर आदि जिलों में मदारी पासी के नेतृत्व में 'एका' या एकता आंदोलन हुआ। यह आंदोलन जमींदारों द्वारा अत्यधिक लगान (50% से अधिक), बेगार और अत्याचार के खिलाफ शुरू हुआ था। किसानों ने शपथ ली कि वे निर्धारित लगान से अधिक नहीं देंगे, जमीन नहीं छोड़ेंगे और बेगार नहीं करेंगे। इस आंदोलन में निम्न जाति के किसानों की व्यापक भागीदारी थी। यद्यपि कांग्रेस और खिलाफत आंदोलन ने इसकी पृष्ठभूमि तैयार की थी, लेकिन मदारी पासी के नेतृत्व में यह एक स्वतंत्र और उग्र किसान आंदोलन बन गया। ब्रिटिश दमन के कारण 1922 में यह आंदोलन समाप्त हो गया।
4.7 बंग-भंग विरोधी आंदोलन में छात्रों की भूमिका का विश्लेषण करें ।
उत्तर: 1905 के बंग-भंग विरोधी आंदोलन में छात्र समुदाय ने अग्रणी भूमिका निभाई। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के आह्वान पर उन्होंने स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार किया और आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार किया, विदेशी वस्तुओं की दुकानों पर धरना (पिकेटिंग) दिया और 'वन्दे मातरम्' के नारों से आकाश गूंजा दिया। जब ब्रिटिश सरकार ने छात्रों को रोकने के लिए 'कार्लाइल सर्कुलर' जारी किया, तो शचिन्द्र प्रसाद बोस के नेतृत्व में 'एंटी-सर्कुलर सोसाइटी' का गठन हुआ। छात्रों ने 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक' दल बनाए और गाँवों में स्वदेशी का संदेश पहुँचाया। उनकी इस सक्रियता ने आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया।
उत्तर: 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत या पाकिस्तान किसी में भी शामिल न होकर स्वतंत्र रहने का निर्णय लिया। लेकिन अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान समर्थित कबायलियों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी। भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन की सलाह पर हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को 'विलय पत्र' (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारतीय सेना ने कश्मीर जाकर हमलावरों को रोका। लेकिन तब तक कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया था (पाक अधिकृत कश्मीर)। पाकिस्तान ने इस विलय को नहीं माना और मामला संयुक्त राष्ट्र में ले गया। तब से कश्मीर समस्या बनी हुई है।
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विभाग 'ङ' : पन्द्रह या सोलह वाक्यों में किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए
5.1 शिक्षा के प्रसार में प्राच्यवादी एवं पाश्चात्यवादी विवाद क्या है? उच्च शिक्षा के विकास में कलकत्ता विश्वविद्यालय (यूनिवर्सिटी) की भूमिका का वर्णन कीजिए ।
उत्तर: प्राच्यवादी-पाश्चात्यवादी विवाद: 1813 के चार्टर एक्ट में भारतीयों की शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपये आवंटित किए गए थे। लेकिन यह धन प्राच्य शिक्षा (संस्कृत, अरबी, फारसी) पर खर्च किया जाए या पाश्चात्य शिक्षा (अंग्रेजी, आधुनिक विज्ञान) पर, इसे लेकर लोक शिक्षा समिति के सदस्यों में मतभेद हो गया। एच.टी. प्रिंसेप, कोलब्रुक आदि प्राच्य शिक्षा के पक्षधर थे, जबकि मैकाले, सैंडर्स आदि पाश्चात्य शिक्षा के। इस विवाद को 'प्राच्य-पाश्चात्य विवाद' कहते हैं। अंततः 1835 में मैकाले के मिनट्स के आधार पर लॉर्ड बेंटिक ने पाश्चात्य शिक्षा के पक्ष में निर्णय लिया।
कलकत्ता विश्वविद्यालय की भूमिका: 1857 में स्थापित कलकत्ता विश्वविद्यालय आधुनिक भारत में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। 1) संबद्धता और परीक्षा: शुरुआत में इसका काम केवल कॉलेजों को संबद्धता देना और परीक्षाएं आयोजित करना था। 2) पाठ्यक्रम निर्धारण: यह विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा से लेकर एम.ए. तक का पाठ्यक्रम और प्रश्न पत्र तैयार करता था। 3) शिक्षा का प्रसार: इसके अंतर्गत पूरे उत्तर और पूर्वी भारत के कॉलेज संचालित होते थे, जिससे उच्च शिक्षा का व्यापक प्रसार हुआ। 4) शोध और राष्ट्रवाद: आशुतोष मुखर्जी के कुलपति रहते हुए यहाँ स्नातकोत्तर पढ़ाई और शोध कार्य शुरू हुआ। इस विश्वविद्यालय ने कई महान विद्वानों और राष्ट्रवादी नेताओं को जन्म दिया।
5.2 मानव प्रकृति एवं शिक्षा के समन्वय में रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों का वर्णन कीजिए ।
उत्तर: रवीन्द्रनाथ टैगोर पारंपरिक औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली को 'तोते की शिक्षा' या 'मशीनी शिक्षा' मानते थे। उनका मानना था कि चारदीवारी में बंद शिक्षा बच्चे के मन का विकास नहीं करती। उनका विश्वास था कि प्रकृति के सानिध्य और मुक्त वातावरण में शिक्षा ग्रहण करने से ही बच्चे के शरीर और मन का पूर्ण विकास संभव है। उनके शिक्षा दर्शन का मूल मंत्र मानव और प्रकृति का गहरा संबंध था।
उन्होंने प्राचीन भारत के तपोवन आश्रम के आदर्श से प्रेरित होकर 1901 में शांतिनिकेतन में 'ब्रह्मचर्य आश्रम' विद्यालय की स्थापना की। यहाँ छात्र पेड़ों की छाया में प्रकृति की गोद में बैठकर शिक्षा प्राप्त करते थे। वे किताबी ज्ञान से अधिक आनंदमय शिक्षा पर जोर देते थे। नाच, गाना, चित्रकला और तकनीकी शिक्षा के माध्यम से वे छात्रों की रचनात्मकता को विकसित करना चाहते थे। उनके इसी विचार का पूर्ण रूप 1921 में स्थापित 'विश्वभारती' है, जहाँ उन्होंने प्राच्य और पाश्चात्य संस्कृति का मेल कराया। वे एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहते थे जो मनुष्य को प्रकृति, समाज और विश्व मानवता के साथ जोड़े।
5.3 बंगाल के नामशूद्र आंदोलन का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर: 19वीं और 20वीं सदी में बंगाल का नामशूद्र आंदोलन दलित समुदाय के आत्मसम्मान और अधिकारों की प्राप्ति के लिए एक शक्तिशाली आंदोलन था। नामशूद्र बंगाल का एक बड़ा कृषि-आधारित समुदाय था, जिन्हें समाज में 'चांडाल' कहा जाता था और जो अछूत माने जाते थे। हरिचंद ठाकुर और उनके पुत्र गुरुचंद ठाकुर के नेतृत्व में मतुआ धर्म के माध्यम से यह आंदोलन संगठित हुआ। हरिचंद ठाकुर ने सरल जीवन और नाम-संकीर्तन के माध्यम से लोगों में एकता और आत्मविश्वास जगाया।
गुरुचंद ठाकुर ने इस आंदोलन को शिक्षा के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा, शिक्षा के माध्यम से ही समाज की उन्नति संभव है। उन्होंने स्कूल स्थापित किए और नामशूद्रों के शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में नामशूद्रों ने भाग नहीं लिया, क्योंकि वे सवर्ण जमींदारों को अपना शत्रु और ब्रिटिश सरकार को अपना मित्र मानते थे। बाद में जोगेंद्रनाथ मंडल के नेतृत्व में यह आंदोलन राजनीतिक रूप ले लिया और दलितों के लिए पृथक निर्वाचन और विधायिका में सीटों के आरक्षण के लिए आंदोलन किया। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप बंगाल का नामशूद्र समाज आत्म-जागरूक हुआ और सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सफल रहा।
এই পেজে সুন্দরবন আদর্শ বিদ্যামন্দির ইতিহাসের প্রশ্নপত্রটির সম্পূর্ণ সমাধান দেওয়া হলো। আশা করি, এই প্রশ্নোত্তরগুলো তোমাদের মাধ্যমিক ২০২৬ পরীক্ষার প্রস্তুতিতে বিশেষ সহায়ক হবে। ইতিহাসের প্রতিটি অধ্যায় খুঁটিয়ে পড়া এবং সঠিক তথ্য মনে রাখা অত্যন্ত জরুরি। নিয়মিত অভ্যাসের মাধ্যমে তোমরা অবশ্যই ভালো ফলাফল করতে পারবে। তোমাদের সকলের উজ্জ্বল ভবিষ্যতের জন্য আমাদের পক্ষ থেকে রইল অনেক অনেক শুভকামনা।
Conclusion
We have provided the complete solution for the History question paper of SUNDARBAN ADARSHA VIDYAMANDIR on this page. We hope these questions and answers will be extremely helpful for your Madhyamik 2026 exam preparation. Reading every chapter of History thoroughly and remembering accurate facts is crucial. With regular practice, you will surely be able to achieve good results. We wish you all a very bright and successful future.
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First Price:₹30 (শুধু প্রশ্ন)
Second Price:₹50 (প্রশ্ন ও উত্তর সহ)
Author: Sourav Bose
Pages: Apx.100 Pages
File Type: PDF Book (5 MB)
Language: Bengali
Publisher: Das Bros PVT LTD
Payment: Online
Return Policy: No Return & Replacement
NB: পেমেন্ট কমপ্লিট হওয়ার পর, ওই পেমেন্টের একটি পরিষ্কার স্ক্রিনশট আমাদের হেল্প লাইন whatsapp নাম্বারে (9062925319) অবশ্যই পাঠাতে হবে এবং কোন কোন বইয়ের জন্য পেমেন্টটা হয়েছে সেটাও উল্লেখ করে দিতে হবে। তারপর আমাদের টিম সেই পেমেন্টটিকে ভেরিফাই করবে এবং রাত 12 টার মধ্যে আপনার পছন্দের পিডিএফ সাজেশন ফাইলগুলি আপনার whatsapp নাম্বারে পাঠিয়ে দেওয়া হবে।